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इंडिया टुडे?

शब्द अब उड़ने लगे हैं। पहले भी उड़ते थे शायद जब कालिदास के ‘मेघदूतम’ का यक्ष मेघों के माध्यम से अपनी प्रेयसी को सन्देश भेजा करता था। शब्द फिर चलने लगे थे। दिल्ली, मुंबई के प्रकाशन घरों से छप कर पत्र-पत्रिकाएं रेलगाड़ियों और बसों से …