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Men Will Be Men! एक सोच, आपकी नज़र

हम कौन सा बदलने वाले हैं, भइया जी! भगवान् का दिया पुरुषार्थ हम काहे भला बदलेंगे? अलग बात रही कि पुरुषार्थ की परिभाषा कुछ और ही है। मगर लोचा भाई के व्याख्यानों से जो पल्ले पड़ा, उसके मुताबिक पुरुषार्थ यही रहा, वो भी भारी लहज़े में-“नारी के सामने बन पड़ो बस! जैसे-तैसे कैसे भी! सजो-सँवरों, इत्र लगाओ! चटक रंग का लिबास ओढ़ लो! नारी की दुनिया में दिखावा महत्व रखता है। देखा नहीं? लो! अब इन लेडीज को ही देख लो! कैसे क्रीम-पाउडर की वाल-पुटी के पीछे एक पुरानी जीर्ण हुयी दिवार भी JK वाल-पुटी वाला मुलायम एहसास देती है! भिआ जी! आप तो अभी जवान हो! बना लो थोड़ी थ्रेडिंग-ब्रेडिंग! जाता क्या है सौ-दो सौ खर्च करके?” मन में एक बार ख्याल आया कि कह दें लोचा भाई से कि पहले अपनी तौंद से नीचे लटकती इस कमीज को तो थोड़ी तमीज सीखा दो! मन मार कर रह गया कि इन्होने ने तो चाय ही बनानी है!

पुरुषार्थ से बाहर कैसे निकलेंगे? जब भी मौका मिलेगा, पुरुषार्थ तो भव्य रूप में दिखाएंगे! दीपक कलाल ने भी तो पुरुषार्थ को जताने हेतु राखी सावंत का चयन किया। सोचने वाली बात यह रहेगी कि दोनों में ‘पुरुष’ कौन बन कर उभरेगा।

फेसबुकीया होने पर भी जब आप comments और like मिलने की किल्लत से जूझ रहे होते हैं तो पहुँचते-पहुँचते आप videos में scroll करते रहते हैं। देखते रहते हैं, देखते रहते हैं। गाहे-वगाहे एक वीडियो आप की सोच के मन-मुताबिक मिल ही जाता हैं। खैर, जब लिख रहा था तब मालूम नहीं था कि ऐसा भी कोई video मिल जायेगा। मिल गया है। जरूर देखिये। लोचा भाई की सोच को सलामी होगी।

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