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गोवा का जुगाड़

धूप भले ही तीखी हो मगर सुबह शाम की ठण्ड गज़ब है। बर्फ से लवरेज़ पहाड़ यूँ तो दिसम्बर में न दिखे कभी। अच्छा भी है, बर्फ टिकी रहेगी। सूरज के पश्चिम पलायन के साथ ही सर्द हवाओं का दब-दबा शुरू हो जाता है। चार बजे के बाद पारे को लुढ़कने में पल नहीं लगते। दिन हो तो जल जाये कोई और रात हो तो जम जाये कोई। राजस्थान से छत्तीसगढ़ वाया मध्यप्रदेश निकलो तो मौसम खुशनुमा है। हाँ! दिल्ली में अमित भाई को थोड़ा जुकाम हो रखा है। हो जायेगा ठीक वो भी! मई का इलेक्शन बोले तो गर्मी वाला महीना। हाँ! हो जायेगा सही।



इस मामले में अपने नरेंदर भाई सही निकले! भारत में गर्मी हो जाये तो इंग्लैंड निकल जाओ, सर्दी बढ़ जाए तो ब्राज़ील! AC और हीटर का खर्चा अपने घर के बिजली के बिल में नहीं जुड़ने देते। प्लानिंग अपुन की भी है अब! गोवा में पड़े रहेंगे, न गर्मी, न सर्दी! बस एयर टिकट का जुगाड़ हो जाए। एयर टिकट न सही, किसी ट्रेन का जनरल टिकट ही दे दो। लुढ़कते-पड़ते कट ही जायेगा सफर। और हाँ! एक रूम होटल में भी प्लीज्! डॉरमिटरी भी चलेगी। नरेंदर भाई, पिलीज! जिस दिन मेरे अकाउंट में पंद्रह लाख हुए, समझो आपका पैसा सूद समेत वापिस! आई शपथ!!

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