Home > Blog > Story > दोस्तों की दुनियादारी

दोस्तों की दुनियादारी

दोस्ती लाजवाब है। दोस्ती है तो सब दुरुस्त है। मिल बैठ कर खा पी लेते हैं। एक चिल्ली चिकन का पीस दर पीस चटनी में डूब कर इतना भी मज़ा न देता अगर दोस्त न होते। किसी को घर जाने की जल्दी हो या बाजार से कुछ खरीदने की दरकार, सब संभालना पड़ता है। जल्दी करो, जल्दी करो की इल्तिज़ा में हम भी अक्सर पिघल जाया करते हैं। पिघलने के साथ साथ निपट जाना कमज़ोरी रही हमारी। समझ रहे हो न! बाहुबली का दाना हम भी चुग लेते हैं। बाहुबली बोले तो GOD! साथ वाले भी बाहुबली ही रहे। बस आर्डर करते रहते, हम चुगते रहते। चुगते चुगते यह समझ नहीं पाए कि घोड़ा कौन और पंछी कौन? खैर! हम तो पंछी ही हैं। उड़ जायेंगे दाना चुग कर! घोड़ा यह बात समझे न समझे!

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: