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अमरीका से इंजिनीयरिंग कर के लौटे एक लौंडे की डायरी से साभार

…और बुधिया को भी प्यार हो गया। ‘एलिजबेथ’ (एलज़ाबेथ/Elizabeth) तो पहले ही बुधिया पर सर्वस्व न्यौछावर कर चुकी थी। गाँव का बुधिया ‘स्टेट्स’ (अमेरिका /US) का वीज़ा हाथ में थामे था। ‘डॉनल्ड ट्रंप’ (डोनाल्ड ट्रम्प/Donald Trump) चाह कर भी बुधिया को आने से नहीं रोक सकता था। ‘एलिज़बेथ’ एक जानी- मानी ‘करिओग्रफर’ (कोरियोग्राफर/choreographer) थी जबकि बुधिया के ‘करिअर’ (कैरियर/carreer) का कोई ठोर-ठिकाना न था। खैर! ‘एलिज़बेथ’ बुधिया के लिए “करियर’ का ही पर्याय थी। दोनों ‘ऑफ़टन’ (ओफ्फन/Often) ‘टिबेटन टेम्पल’ (तिब्बतियन/Tibetan) के पास वाले ‘रेस्ट्रॉँ’ (रेस्टोरेंट/Restaurant) में बतियाते देखे जा सकते थे, जहाँ विभिन्न ‘जॉनर’ (जेनर/Genre) के गाने बजते रहते। गाँव के बेहले मुस्टण्डे आते जाते खड़पों के तरह झांकते रहते। कभी कभी बुधिया के गले में महंगा सा DSLR लटका रहता जिस से वह ‘एलिज़बेथ’ की ‘फटॉग्रफी’ (फोटोग्राफी/Photography) करता।
आज बुधिया ‘स्टेट्स’ से वापिस घर लौट रहा था। खूब धन जोड़ कर लाया। बस ‘एलिज़बेथ’ को न ला सका। दोनों का ‘डिवॉर्स’ (डाइबोर्स/Divorce) हो चुका था।

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