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Men Will Be Men! एक सोच, आपकी नज़र

हम कौन सा बदलने वाले हैं, भइया जी! भगवान् का दिया पुरुषार्थ हम काहे भला बदलेंगे? अलग बात रही कि पुरुषार्थ की परिभाषा कुछ और ही है। मगर लोचा भाई के व्याख्यानों से जो पल्ले पड़ा, उसके मुताबिक पुरुषार्थ यही रहा, वो भी भारी लहज़े …

शुभ मंगल सावधान!

आज एक भस्सड़ हुयी। कुछ पुराने अजीज मित्रों से अचानक ही मुलाकात हो गयी। चेहरे पर ख़ुशी का नूर महसूस किया जा सकता था। बीच राह में कुछ पुराने किस्से साँझा किये गए। बातें कुछ इस कदर बढ़ती गयीं कि कहना ही पड़ा ‘चलो! एक-एक …

सूरज के साथ साथ

क़िस्सा यह भी सही रहा। सूरज के साथ कॉम्पटिशन कर बैठे। विपरीत दिशा में बह निकले। सूरज भिया जी ठहरे सूरज! जहूँ निकले, चारों ओर उजाला। हम तो कभी शाम से कभी अंधेरे से परिचय पाते आगे बढ़ रहे थे। सोचा न था कि पीछे …

विज्ञापन की मशहूरी

विज्ञापन आम जनता में पहुँच बनाने के लिए बनाये जाते हैं। विज्ञापनों की दुनिया उतनी ही पुरानी है जितनी पत्रिकाएं। पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और टेलीविज़न से बाहर झांकते यह विज्ञापन हमारे बचपन में ‘मशहूरी’ के नाम से जाने जाते थे। अधिक पब्लिक स्कूल खुल जाने …