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इंडिया टुडे?

शब्द अब उड़ने लगे हैं। पहले भी उड़ते थे शायद जब कालिदास के ‘मेघदूतम’ का यक्ष मेघों के माध्यम से अपनी प्रेयसी को सन्देश भेजा करता था। शब्द फिर चलने लगे थे। दिल्ली, मुंबई के प्रकाशन घरों से छप कर पत्र-पत्रिकाएं रेलगाड़ियों और बसों से …

Men Will Be Men! एक सोच, आपकी नज़र

हम कौन सा बदलने वाले हैं, भइया जी! भगवान् का दिया पुरुषार्थ हम काहे भला बदलेंगे? अलग बात रही कि पुरुषार्थ की परिभाषा कुछ और ही है। मगर लोचा भाई के व्याख्यानों से जो पल्ले पड़ा, उसके मुताबिक पुरुषार्थ यही रहा, वो भी भारी लहज़े …

अनजान सा शख्स

अनजान सा शख्स टटोलता अनजान सी राहें आज पहुँच गया मेरे दर-दरवाजे पर मंज़िल का पता पूछता है मैंने भी दे दिया अपने बेटे का रोल नंबर ढूंढ लो साथ मिल कर उसे भी तो पानी है मंज़िल

खामोश व्यक्तित्व का परिचय

गणित के इक्के-दुक्के जादूगर शेष हैं आज। एक जादूगर और चला गया। गणित के लेखे-जोखे से हट कर साहित्य के पन्नों में अपना नाम दर्ज़ करवा दिया। प्रवक्ता शशि शर्मा! आज शशि शर्मा जी हिंदी के प्रवक्ता हो लिए। गणित की रूप सज्जा अब हिंदी …

कप का ब्रेक-अप

स्टील के मज़बूत गिलासों का ज़माना था। रिश्ते भी उतने मज़बूत हुआ करते थे। हाथ से छूट भी पड़ें, टूटते नहीं थे। न गिलास, न रिश्ते। घर वालों की चाय अमूमन स्टील के गिलासों में ही हुआ करती थी। मेहमानवाज़ी हर शख्स की फितरत थी। …