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भारत भूषण – एक संस्मरण

पकोड़ों की महफ़िल के पीछे कई किस्से गुमनाम से पड़े उभर आये। किसी शख्स की शख्शियत आपके उसके प्रति बर्ताव की कहानी भी बयान करती है। कुछ हो न हो, भला ही रहा। जो समय बेहतर गुज़ार लिया, सर्वश्रेष्ठ था। एक सेवानिवृत व्यक्ति की छवि में जब आपको पिता की बजाय एक मित्र का अक्स नज़र आये तो समझ लीजिये इंसान सही है। उम्र का अंतर जब उँगलियों पर गिनने की विषय वस्तु न रहे तो समझ लीजिये मित्रता है। उम्र तो महज एक आंकड़ा है। उम्र ज़िंदादिली से आंकी जाती है। बिमारियों से जूझ कर निकला व्यक्ति सब अच्छाई बुराई पहचान लेता है। बिलकुल इस शख्स की भांति ! कुछ था जो हम करीब रहे, कुछ है जो हम अक्सर याद करते हैं। एक यादों का पन्ना आप के नाम!

आपकी लम्बी उम्र की दुआओं की कामनाओं के साथ,

मैं, राहुल

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