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Headline vs ADline

ख़बरें आती जाती रहेंगी। खबर छप कर कुछ घंटों बाद इतिहास बन जाती है। समाचार पत्रों का उनके गर्भावस्था से आपके दरवाजे तक पहुँचने का कार्यकाल और उनका उम्रकाल बस कुछ ही घंटों का होता है। एक नज़र डाल कर आप उसे रद्दी घोषित कर देते हैं। अमूमन गहरायी से इन समाचार पत्रों का अध्ययन करने वाले इनका सार समझ पाते हैं। The Tribune हमे पिता जी से विरासत में मिला। अक्षर जोड़ जोड़ कर पढ़ा करते थे। पिता जी अक्सर कहा करते: “अंग्रेजी सीखने का सबसे उत्तम माध्यम अंग्रेजी अखबार है।” अखबार, लेट ही सही, घर पर आती रही। भार्गव Dictionary का छोटू edition साथ रखते। शब्द underline हो कर उस dictionary से हिंदी में मतलब पाते। खैर, बचपन की बात है। बड़े हुए तो पता चला कि खबर के नहीं, हेडलाइंस के मायने होते हैं। एक स्टेटमेंट के अनुसार “Newspapers are the mouthpiece of political organisations.” अब समझ आ गया था। The Tribune और भार्गव के छोटू एडिशन के योगदान से थोड़ी बहुत अंग्रेजी सीख ली थी। हमने अंग्रेजी सीख ली. कुछ ने शायद हिंदी सीख ली। समाचार पत्र सभी की सुबह का अभिन्न अंग बनते गए। हम पाठकों ने समाचार पत्र पढ़ना तो सीख लिए मगर इनके पीछे छुपी मंशाओं को नहीं। The Tribune कांग्रेस का हो लिया। Indian Express के राम नाथ गोइन्का जी RSS के होते हुए भी अपनी सत्ता कांग्रेस को सौंप गए। The Hindu वाले JNU और नक्सली आंदोलन के समर्थन करते अक्सर नज़र आते हैं। अंग्रेजी समाचार पत्र के नशे में चूर अमूमन हर सुबह तीन चार समाचार पत्र लेकर निकलता हूँ। जानता हूँ कि खबर वही होगी जो सुबह news chanel पर आ रही थी। बस देखना है तो इनका headline!

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