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फक्कड़ों का शहर शिमला

शिमला अक्सर इक ख्वाब सा प्रतीत होता है। बड़ी बड़ी छतरियों को लेकर माल रोड पर घूमते हुए महानुभावों का एक स्टेटस प्रतीत होता है। बहुत ही बचपन से शिमला का अक्स देखा है। पिता जी ने एक गोल रंगीन गाँधी चश्मा, लक्कड़ बाजार से एक बेंत और फेरी वाले से P- कैप दिला दिया। घोड़े की सैर भी की। शहंशाह बन कर घूमे थे उस दिन। स्कैंडल पॉइंट पर पान वाला एक स्टेटस मेकर टाइप था। मुंह में पान की गिलोरी और 50 पैसे का एक सिगरेट शायद पिता जी के लिए एक स्टेटस था। शान थी वह भी। धूम्रपान बंद हुआ, थूकना बंद हुआ, वह स्टेटस भी शायद लुप्त हो गया। बड़े हुए तो यूनिवर्सिटी में शायद शनिवार या इतवार को माल की गेड़ी स्टेटस बन गयी। महीने के पहले दिनों में शान से घूमते थे स्टेटस ले कर! आखिरी दिन कोई न कोई बहाना बना कर अक्सर टाल दिया करते। शिमला तो फक्कड़ है! फक्कड़ लोगों के लिए है। यह कभी अमीरी गरीबी नहीं पहचानता। सेब वाले यहाँ अमीर बन कर भी खरीददारी करते हैं और गरीब होने पर घूमते भी हैं। मॉल रोड सब के बाप का है। यहाँ घूमना खुद में एक स्टेटस है. नहीं है तो राज नेताओं का। इनको कभार ही घूमते देखा है यहाँ। आ जाईये शिमला, माल रोड पर थकिये मत! भांत भांत और प्रांत प्रांत के लोग मिल जायेंगे। बना लीजिये स्टेटस अपना इसे। सब का स्टेटस है यह। किसी के बाप की जागीर नहीं।

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